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अल्लाबंदा का सवाल क्या जाट हमें अपने खेतों में देंगे काम |
अब दंगा पीड़ितों को खुद अपने लिए राशन और अन्य बुनियादी जरूरतों का जुगाड़ करना होगा। शाहपुर के अल्लाबंदा ने बताया कि मजदूरी के लिए हम लोग जा रहे हैं। कुछ-कुछ काम मिल जाता है। पर मजदूरी करें तो कहां करें? क्योंकि इस इलाके में तो अधिकतर लोग खेतों में काम करते थे। हम लोग तो मजदूर लोग हैं। खेत तो अधिकतर जाटों के ही हैं। हमें तो मुआवजा भी नहीं मिला। क्या करें कुछ समझ नहीं आता? अब मुआवजे के लिए चक्कर लगाएं या रोजी रोटी जुगाड़ें।
मुजफ्फरनगर और शामली में लगातार दो दिनों से बारिस हो रही है। इस बीच शामली के दाऽोरी खुर्द कैंप में 5 फरवरी को ढाई साल के एक बच्चे की निमोनिया और मलकपुरा कैंप में 28 जनवरी को एक छह साल की बच्ची की ठंड लगने से मौत हो गई।
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